hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • अरविन्द बाबू

    हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर रा...

  • सावन

    सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की क...

  • रिश्तों का बाजार

    रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चां...

जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ" और "ना"...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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मेरी जिंदगी का सफर 4 By Ankit Khatri

      पढ़ाई जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब बचपन पीछे छूटने लगता है और भविष्य सामने खड़ा दिखाई देने लगता है।मेरी जिंदगी में भी वह समय आया।अब सिर्फ आज के बारे में सोचना काफी नहीं था...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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दूध बताशा राजा खाए By Deepak sharma

  समर वेकेशन के बाद हमारा कालेज जब खुला तो हमारे मनोविज्ञान विभाग में एक बड़ा सरप्राइज़ हमारी प्रतीक्षा में था। 38- वर्षीया हमारी विभागाध्यक्षा का मेक-ओवर। एकदम नए स्टाइल में...

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अरविन्द बाबू By Prafulla Kumar Tripathi

हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर राम,शंकर राम,चंदर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम त्रिपाठी।विशेषर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम की आगे की वं...

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मृत्यु के बाद की यात्रा एक आत्मा की अनजानी दुनिया की ओर यात्रा By Aloka Patel

मृत्यु…यह शब्द सुनते ही इंसान के मन में एक अनजाना डर पैदा हो जाता है।मृत्यु के बाद क्या होता है?क्या सब कुछ समाप्त हो जाता है?क्या आत्मा सचमुच शरीर छोड़कर कहीं जाती है?क्या हम फिर...

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The Diary Of Pankaj - Hindi Edition By Pankaj Modak

The Diary Of Pankaj Hindi EditionBy Pankaj Modak Published By TDOP Publisher, 2026.Copyright Page:- While every precaution has been taken in the preparation of this book, the publi...

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एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 4 By Aloka Patel

भाग ४ — पत्नी की शिकायतेंरात को हर्ष का मैसेज पढ़ने के बाद भी मिहिर को नींद नहीं आई।निशा उसके बगल में सो रही थी।मिहिर छत की ओर देख रहा था।पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया था।पा...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

भारतीय समाज में सदियों से पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को लेकर कुछ अघोषित नियम तय रहे हैं। पारंपरिक व्यवस्था में माना जाता रहा है कि पुरुष का मुख्य काम घर से बाहर जाकर आजीविका कम...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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Anime - 2 By shifa

ભાગ ૧ માં જોયું કે shin sisuk ને પડી નાખી છે ભાગ ૨ , sisuk કહે છે હું બેહોશ નથી થયું તે મને કેમ પાડયું shin કહે છે અરે હું તો તને બચાવ તી હતી. અછા તો તું આ નાના તળાવ માં ડૂબતો હતો...

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एक रैगिंग ऐसा भी By Virendra Dewangan

‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शाम को सीनियर छात्र यश ने जूनियर सरेश को लताड़ा।‘‘जी-जी, देख ही रहा हूं। कितना...

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मुंह दिखाई का नेग By Vandna Sharma

रीना जब पहली बार ससुराल गई, तो अजब ही रस्म देखी।जुलाई की चिपचिपी गर्मी, उमस भरा मौसम, और उस पर दुल्हन के भारी-भरकम कपड़े, ज्वैलरी। आते ही सास ने दहलीज पर आरती नहीं उतारी, सीधा पूजा...

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बौना जिन्न By Deepak Kumar Tiwari

बौना जिन्नअध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमानगाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ही समझदार और पढ़ने-लिखने की शौकीन लड...

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व्याधि By Deepak sharma

              “एक मरीज़ को आप से बोटौक्स इंजेक्शन दिलाना है,सर,” सुशील कुमार अपने रोगियों के लिए मेरी सेवाएं अक्सर मुझ से मांग लिया क...

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पापा का स्कूटर By Chandni

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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भूल गया नाम By Virendra Dewangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ" और "ना"...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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मेरी जिंदगी का सफर 4 By Ankit Khatri

      पढ़ाई जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब बचपन पीछे छूटने लगता है और भविष्य सामने खड़ा दिखाई देने लगता है।मेरी जिंदगी में भी वह समय आया।अब सिर्फ आज के बारे में सोचना काफी नहीं था...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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दूध बताशा राजा खाए By Deepak sharma

  समर वेकेशन के बाद हमारा कालेज जब खुला तो हमारे मनोविज्ञान विभाग में एक बड़ा सरप्राइज़ हमारी प्रतीक्षा में था। 38- वर्षीया हमारी विभागाध्यक्षा का मेक-ओवर। एकदम नए स्टाइल में...

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अरविन्द बाबू By Prafulla Kumar Tripathi

हमलोगों के आदि पुरखा पं.देवदत्त राम त्रिपाठी थे।उनके पांच पुत्र हुए-पं.विशेषर राम,शंकर राम,चंदर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम त्रिपाठी।विशेषर राम,चतुर्भुज राम और राजाराम की आगे की वं...

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मृत्यु के बाद की यात्रा एक आत्मा की अनजानी दुनिया की ओर यात्रा By Aloka Patel

मृत्यु…यह शब्द सुनते ही इंसान के मन में एक अनजाना डर पैदा हो जाता है।मृत्यु के बाद क्या होता है?क्या सब कुछ समाप्त हो जाता है?क्या आत्मा सचमुच शरीर छोड़कर कहीं जाती है?क्या हम फिर...

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The Diary Of Pankaj - Hindi Edition By Pankaj Modak

The Diary Of Pankaj Hindi EditionBy Pankaj Modak Published By TDOP Publisher, 2026.Copyright Page:- While every precaution has been taken in the preparation of this book, the publi...

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एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 4 By Aloka Patel

भाग ४ — पत्नी की शिकायतेंरात को हर्ष का मैसेज पढ़ने के बाद भी मिहिर को नींद नहीं आई।निशा उसके बगल में सो रही थी।मिहिर छत की ओर देख रहा था।पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया था।पा...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

भारतीय समाज में सदियों से पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को लेकर कुछ अघोषित नियम तय रहे हैं। पारंपरिक व्यवस्था में माना जाता रहा है कि पुरुष का मुख्य काम घर से बाहर जाकर आजीविका कम...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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Anime - 2 By shifa

ભાગ ૧ માં જોયું કે shin sisuk ને પડી નાખી છે ભાગ ૨ , sisuk કહે છે હું બેહોશ નથી થયું તે મને કેમ પાડયું shin કહે છે અરે હું તો તને બચાવ તી હતી. અછા તો તું આ નાના તળાવ માં ડૂબતો હતો...

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एक रैगिंग ऐसा भी By Virendra Dewangan

‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शाम को सीनियर छात्र यश ने जूनियर सरेश को लताड़ा।‘‘जी-जी, देख ही रहा हूं। कितना...

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मुंह दिखाई का नेग By Vandna Sharma

रीना जब पहली बार ससुराल गई, तो अजब ही रस्म देखी।जुलाई की चिपचिपी गर्मी, उमस भरा मौसम, और उस पर दुल्हन के भारी-भरकम कपड़े, ज्वैलरी। आते ही सास ने दहलीज पर आरती नहीं उतारी, सीधा पूजा...

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बौना जिन्न By Deepak Kumar Tiwari

बौना जिन्नअध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमानगाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ही समझदार और पढ़ने-लिखने की शौकीन लड...

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व्याधि By Deepak sharma

              “एक मरीज़ को आप से बोटौक्स इंजेक्शन दिलाना है,सर,” सुशील कुमार अपने रोगियों के लिए मेरी सेवाएं अक्सर मुझ से मांग लिया क...

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पापा का स्कूटर By Chandni

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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भूल गया नाम By Virendra Dewangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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